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सीएम हेमंत ने फोन से असम में दिया भाषण, बोले– मुझे जनसभा में जाने से रोका असम के चाबुआ विधानसभा के मेरे भाइयों-बहनों से मिलने से भी मुझे रोका गया, लेकिन विरोधियों का ऐसा षड्यंत्र कभी कामयाब नहीं होगा।

सत्ता के घमंड में चूर होकर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, ताकि सच्चाई जनता तक न पहुंचे। प्रचार रोकना, रास्ता रोकना, यही इनकी कुनीति है।

लेकिन हमारा संघर्ष झुकने वाला नहीं है, रुकने वाला नहीं है।

यह लड़ाई सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई है। असम के आदिवासी समुदाय को एसटी का अधिकार न देना, कुछ और नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय अन्याय है। चाय बागान के श्रमिकों को ₹500 न्यूनतम मजदूरी मिलना उनका हक है, और यह हक हम लेकर रहेंगे। आदिवासी समाज को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे।

आप सभी से अपील है कि सब एकजुट हो जाइए, क्योंकि आपकी एकजुटता ही वर्षों से आपका शोषण करने वालों की सबसे बड़ी हार बनेगी।

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